Wednesday, June 16, 2010

सत्यापन

आवेदन-पत्र जमा करवाने की अन्तिम तिथि के दिन वह आठ बजे ही खिङकी के पास आकर खङा हो गया ताकि दोपहर तक  वापिस गाँव लौट सके। साढे दस बजे खिङकी खुलते ही उसने समस्त संलग्न दस्तावेज के साथ आवेदन-पत्र बाबू की तरफ सरका दिया। बिना आय प्रमाणित के अधूरा आवेदन-पत्र स्वीकार नही किया जा सकता, कहते हुए बाबू ने आवेदन-पत्र वापिस लौटा दिया। उसने सक्षम अधिकारी का प्रमाण-पत्र संलग्न बताया,पर बाबू के पास उसकी दलील सुनने का वक्त नही था, पीछे की अंधी-बहरी भीङ ने उसे निकाल बाहर किया। पास ही खङे कुछ नेता टाइप छात्र उसे एक तरफ ले जाकर समझाने लगे , शाम तक घूमता रहेगा तो भी कोई सत्यापित करने वाला नही मिलेगा, उन्होंने जेब से मोहर निकाली........उसके सामने मां की नसीहते, विद्यालय के गुरूजी , किताब के  नैतिकता वाले पाठ, अनमोल वचन  आकर खङे हो गये। वह अपना आवेदन-पत्र लेकर वहां से खिसक लिया। वह महाविद्यालय में कार्यरत व्याख्याताओं के पास जाता है सबकी अपनी व्यस्तताएं ,दलीले व मजबूरियां थी। वह अस्पताल, कलेक्ट्रेट परिसर जाता है..लेकिन सब जगह मजबूरी खङी मुस्करा रही थी। आवेदन-पत्र जमा करवाने की अन्तिम तिथि......शाम के चार बजने वाले थे.....अजनबी शहर......गाँव जाने वाली अन्तिम बस...... वह बुझे मन, भारी कदमों से महाविद्यालय की ओर लौट आता है......वहां खङे छात्र नेता मुस्करा कर उसके हाथ से आवेदन-पत्र  छीनकर सत्यापित कर देते है.....वह कांपते हाथों से आवेदन-पत्र खिङकी से बाबू को  देता है....बाबू उसकी तरफ मुस्करा कर  देखता है और पावती रसीद उसके हाथों में रख देता है। रसीद देखता वह अनचाही, अज्ञात-सी खुशी के साथ बस स्टेन्ड की ओर बढ जाता है... आखिर  व्यवस्था के प्रथम कदम  का सफलतापूर्वक   सत्यापन हो गया था।।

10 comments:

दुलाराम सहारण said...

सत्‍य बयानी है। साहित्‍य का यही उज्‍ज्‍वल पक्ष है।

प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में बदलाव समय की मांग है, और 'स्‍वयं प्रमाणित'स्‍वीकार करना ही पड़ेगा।


नहीं तो हर एक के जेब में नकली मोहर मिलती रहेगीं। और सिद्धांतों की बलि दी जाती रहेगी।

kshama said...

Aah!

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

Ravinder Budania said...

your short story has jolted my heart at a depth, my heart is bleeding for those students..........he will never return back from my door step..........

Ravinder Budania said...

your story has jolted my heart.....this is system failure...next time he will not return from my door step.....

कमलेश वर्मा said...

wah..ummed ji ''GAGAR ME SAGAR ''bhar diya aapne ...vartman vyvstha ko prtibimbit karti sabal rchna....

हरकीरत ' हीर' said...

अच्छा लिखते है आप ....!!

दिगम्बर नासवा said...

आज का कठोर सत्य लिखा है ...

Rajendra said...

मूलजी , सोनीजी,भवानीजी ... लाटाजी और उम्मेद्जी ..और आपकी पूरी टीम को साईकिल - सवारी की बधाई ....

Rajendra said...

मूलजी , सोनीजी,भवानीजी ... लाटाजी और उम्मेद्जी ..और आपकी पूरी टीम को साईकिल - सवारी की बधाई ....