Thursday, April 15, 2010

एक सार्थक प्रयास.............


साइकिल-समय की जरूरत

ये कम्यूनिटी उन सभी साथियों का स्वागत करती है जो पर्यावरण

संरक्षण,ऊर्जा के संसाधनों की बचत व स्वस्थ भारत के निर्माण हेतु

साइकिल से अपने कार्यस्थलों पर जाते है व दैनिक जीवन में

साइकिल के प्रयोग को बढावा देते है।















श्री दिनेश कुमार चारण
व्याख्याता-इतिहास












श्री अरविन्द कुमार
व्याख्याता-समाजशास्त्र














श्री केशरदेव
व्याख्याता-जीवविज्ञान










श्री बी.एल. मेहरा
व्याख्याता-जीवविज्ञान














श्री मूलचन्द
व्याख्याता-संस्कृत














श्री पी.आर.मेघवाल
व्याख्याता-वनस्पतिशास्त्र













श्री रविन्द्र कुमार
व्याख्याता-भूगोल













श्री जगजीत सिंह कविया
व्याख्याता-समाजशास्त्र












श्री भवानीशंकर शर्मा
व्याख्याता-संस्कृत













श्री हेमन्त मंगल
व्याख्याता-भूगोल












श्री एस.के.सैनी
व्याख्याता-कानून












श्री राजकुमार लाटा
व्याख्याता-हिन्दी














डा.एम.ए.खान
व्याख्याता-भूगोल










श्री सुरेन्द्र डी. सोनी
व्याख्याता-इतिहास










श्री कमलकिशोर वर्मा
व्याख्याता-रसायनशास्त्र











श्री नरेश सिंह











श्री भंवर लाल







पृथ्वी बचाओ

साइकिल अपनाओ..........



राजकीय लोहिया महाविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ विभिन्न सांस्कृतिक व सृजनात्मक गतिविधियों का केन्द्र रहा है। यहाँ के व्याख्याता भी सदैव नये दृष्टिकोण व विचारों का स्वागत करते है।महाविद्यालय का स्टाफ रूम वैचारिक,बौद्धिक बहस का केन्द्र बिन्दु होता है। इन बहसों मे महाविदयालय से लेकर विश्व घटनाक्रम समाहित होता है। हाल के दिनों मे बहस का ज्वलंत मुद्दा वैश्विक स्तर पर हो रहे पर्यावरण परिवर्तन से संबंधित था। पृथ्वी के तापमान मे निरन्तर हो रही बढोतरी,इसी परिप्रेक्ष्य मे आयोजित होने वाले विभिन्न सम्मेलन,इन्टर गवर्नमेन्टल पैनल आन क्लाइमेन्ट चेन्ज की रिपोर्ट,पिघलते ग्लेशियर,वैश्विक स्तर पर हो रहे मौसमी परिवर्तन,अतिवृष्टि व अल्पवृष्टि,प्रदूषित होती नदियां,निरन्तर घटते वन व वन्यजीव,कार्बन उत्सर्जन और इन सब के बीच दूरदर्शन के विज्ञापन में मासूमियत के साथ सवाल करता एक बच्चा कि-'"आप इस तरह पेट्रोल खर्च करोगे तो भविष्य के लिए पेट्रोल बचेगा ही नहीं।"
इन बहसों में समस्याओं के सभी पहलुओं पर विचार ही नहीं किया जाता वरन् इस दिशा मे सार्थक कार्य,समाधान भी प्रस्तुत किये जाते है। वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु संबंधी परिवर्तन,पर्यावरण प्रदूषण,व उर्जा के संसाधनो मे निरन्तर कमी मानव जाति के लिए चिन्ता का विषय है। इस दिशा मे वैश्विक स्तर पर किये जा रहे प्रयास नाकाफी है। समय की माँग है कि आज प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर भी इस दिशा मे सार्थक प्रयास करे। इसी तथ्य को ध्यान मे रखकर समान विचारधारा व रचनात्मक सोच वाले, महाविद्यालय के (सर्वश्री राजकुमार लाटा व्याख्याता-हिन्दी, एम.ए.खान व्याख्याता-भूगोल,श्रवण सैनी व्याख्याता-कानून, हेमन्त मंगल व्याख्याता-भूगोल, दिनेश किमार चारण व्याख्याता-इतिहास, भवानीशंकर शर्मा व्याख्याता-संस्कृत, जगजीत सिंह कविया व्याख्याता-समाजशास्त्र,रविन्द्र कुमार व्याख्याता-भूगोल, मूलचन्द व्याख्याता-संस्कृत, पी.आर.मेघवाल व्याख्याता-वनस्पतिशास्त्र, केशरदेव व्याख्याता-जीवविज्ञान, अरविन्द कुमार व्याख्याता-समाजशास्त्र,श्री कमलकिशोर वर्मा व्याख्याता-रसायनशास्त्र,श्री सुरेन्द्र डी. सोनी व्याख्याता-इतिहास, श्री नरेश सिंह, श्री भंवर लाल ) संवेदनशील व्याख्याता सामूहिक निर्णय करते है कि वे अगले सत्र में महाविद्यालय मे साइकिल से ही आयेंगे। इस तरह ये सभी साथी सेव प्लेनेट अर्थ,पर्यावरण संरक्षण व भविष्य के लिए ऊर्जा बचत की मुहिम मे सहयोग करेंगे।
छठे वेतन आयोग के बाद जहाँ कारों का प्रचलन बढा है और लोग भौतिकता की और आकृष्ट है ऐसे मे ये निर्णय साहसिक है। साथियों के सम्मुख चुनौतिया तो बहुत है पर असली चुनौती तो चुरू का मौसम है जिसे लक्ष्य कर उर्दू के व्याख्याता व प्रसिद्ध शायर एहतशाम अब्बास हैदरी ने कहा है-
इस शहर के मौसम में नई बात है ऐसी।
रातों में बदन उसका महकने नहीं पाता।।
सेव प्लेनेट अर्थ,पर्यावरण संरक्षण,ऊर्जा बचत इस मुहिम का प्रमुख लक्ष्य है पर साइकिल के अप्रत्यक्ष लाभ भी नजरअन्दाज नहीं किये जा सकते। इसके आर्थिक व शारीरिक पहलू भी आकर्षित करते है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लगभग 115 कर्मचारी व 3200 नियमित विद्यार्थियों वाले इस महाविद्यालय मे और लोग भी प्रेरित होकर इस अभियान का हिस्सा बने..........और फिर महाविद्यालय की परिधि से बाहर निकल यह अभियान अन्य लोगों की प्रेरणा बने तभी इसकी सार्थकता है। वैसे भी मिलों लम्बे सफर की शुरूआत प्रथम कदम से ही होती है।

3 comments:

दुलाराम सहारण said...

बहुत अच्‍छा प्रयास। आप सब साधुवाद के पात्र हैं। अगर ऐसा सचमुच में हो जाता है तो यह एक ऐतिहासिक पहल होगी।

शुभकामनाएं।


मेरे योग्‍य जो भी होगा, सदैव तत्‍पर हूं।

सुरेश कुमार शर्मा said...

स्टाफ रूम में आप सामूहिक चिंतन करने के लिए समय निकाल पाते हैं, धन्यवाद। पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदना के कारण लिया गया आपका यह निर्णय अनुकरणीय व रक्षणीय है। आपके संकल्प की रक्षा आप अकेले लम्बे समय तक नही कर पाएंगे। किसी संकल्प को सामाजिक सम्मान न मिले तो निभाना भार हो सकता है। महाविद्यालय के वरिष्ठ वर्ग को चाहिए कि अन्य साथीगण आपके इस प्रयास को उपहास का विषय ना बना पाए। इसके लिए महाविद्यालय के पार्किंग क्षेत्र में साइकिल पार्किंग को विशेष दर्जा देकर वे इस आचरण को आदर्श के रूप में प्रदर्शित कर सकते हैं। पार्किंग स्थल के विकास के हिस्से के बजट में साइकिल पार्किंग स्थल को प्राथमिकता आदि कदम उपयोगी हो सकते हैं। साइकिल पार्किंग व अन्य वाहनों के पार्किंग स्थान का यह अंतर इस प्रकार होना चाहिए कि अन्य वाहनों के चालक को साइकिल चलाने की प्रेरणा मिले। अन्यथा खतरा यह है कि अतीत में कुछ समय के किए गए आचरण को लोग अपनी अतीत की आदत के रूप में याद करते रहने के मजे लेते देखे गए हैं। ईश्वर और महाविद्यालय के वरिष्ठ जन आपके इस संकल्प की पालना में सहयोगी हो इसी प्रार्थना के साथ ...

सुरेन्द्र सोनी said...

कुछ दिन बाद लोग हमारा अनुसरण करेंगे और गर्व से कहेंगे - '.... अब हम भी साइकिल वाले हो गए हैं....!!'